Wednesday, November 23, 2011
Wednesday, November 16, 2011
कुमकुम गुप्ता
जाने क्यों बच्चे हमें समझा रहे हैं आज - कल
अनुभवी खुद को ही कहला रहे हैं आज - कल !
मांग अपनी सामने रखते हैं शर्तों की तरह
उनके तरीके काम के दहला रहे हैं आज-कल !
उनके सपनों की तहों को जानना चाह जरा
सन्दर्भ बातों का बदल टहला रहे हैं आज-कल !
रोज ही नाराजगी के रंग चेहरे पर पढूं
घाव दे कर भी कहें सहला रहे हैं आज-कल !
उनके कारण पायलों सी जिन्दगी होती बसर
सत्य कहने में हमीं हकला रहे हैं आज-कल !
Tuesday, November 15, 2011
आशा शर्मा
भूतपूर्व अध्यक्ष
हिंदी लेखिका संघ
मध्यप्रदेश , भोपाल
गुजरती है रात मैं कहती खुदा का शुक्र है
उनके आने का समय पहले से कुछ कम तो हुआ !
हर घड़ी बीती घड़ी से दर्द ज्यादा दे रही
जो अभी आई नहीं उसका अभी से गम हुआ !
सह रही हूँ चोट मैं चुपचाप पत्थर सी बनी
जानती हूँ आके धीमे से कहोगे क्या हुआ ?
आँख में आंसूं कहाँ यह आपका ही हुक्म है
किन्तु दिल कमबख्त जाने है कहाँ डूबा हुआ ?
क्या तुम्हें आवाज यह गम की सुनाई दी नहीं ?
हो जहाँ भी थाम लो आकर बनो कुछ मेहरबां !
Wednesday, August 17, 2011
मधु सक्सेना
वीरान छुपा होता है
मय के हर प्याले में तूफ़ान छुपा होता है
दिले आशिकी में आसमान छुपा होता है !
एक गजल ही मुक्कमल है शायर के लिए
हर एक गजल में दीवान छुपा होता है !
जब दर्द ही दर्द को गले लगाता है
हमदर्द के जज्बातों में इन्सान छुपा होता है !
आकर दिले मकां में जाने का जो नाम न ले
घर के हर कमरे में जहान छुपा होता है !
हर बात में हंसते हर बात में मुस्कुराते हैं
दिल के पातालों में वीरान छुपा होता है !
खैरात दिया करते तीखी मुस्कुराहटों के संग
खुदी की इन खैरातों में एहसान छुपा होता है !
जाने कौन दफन है ऊँचे महलों के नीचे
जमीं जिन्दगी में ज्यों कब्रिस्तान छुपा होता है !
गीत , गजल , नज्म ,रुबाई , हर लफ्ज फलसफा होता है
तहरीरों की तह में देखो उन्वान छुपा होता है !
हम हैं तुम हो या कोई और आदम
मधु मुस्कानों में भगवान छुपा होता है !
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